"Either lead, follow or get out of the way"
कायदे से तो समिति के सदस्यों को स्वयं निर्माण स्थल पर खडे होकर यहाँ सुनिश्चित करना चाहिये था कि कोई व्यक्ति ताजी बनी सडक पर न चले तथा मजदूर, मिस्त्री, ठेकेदार इत्यादि को चाय पानी को भी पूछना चाहिये था। शर्मा जी से आगामी विकास कार्यो के बारे मे चर्चा करनी चाहिये थी। परंतु ऐसा कुछ भी नही हुआ। सब कुछ उल्टा ही हुआ। बात यहाँ है कि शर्मा जी को क्रेडिट मिल गया तो हमारा क्या होगा।
अगर समिति को यही सब करना है तो बेहतर हो कि अपनी समाज सेवा कि दुकान बंद करके ही राजनीति करे।
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