Friday, 13 August 2010

सोलानीपुरम जन कल्याण समिति एवं सोलानीपुरम वेलफ़ेयर एसोसिऐशन के कार्यो की समीक्षा

All growth depends upon activity. There is no development physically or intellectually without effort, and effort means work.

सोलानीपुरम जन कल्याण समिति एवं सोलानीपुरम वेलफ़ेयर एसोसिऐशन के कार्यो की समीक्षा के; बिना यह ब्लाग कुछ अध;ूरा सा है। विगत कुछ वर्षो मे दोनों समितियो ने कुछ रचनात्मक कार्य किये हैं जिनको नकारा नही जा सकता है। कुछ कार्य तो ऐसे हैं जिनमे प्रशासन अथवा जनप्रतिनिधियो का कोई दखल नही है जैसे सोलानीपुरम की टेलिफ़ोन डायरेक्ट्री, गाइड मैप, ट्रांसफ़ार्मर के पास ट्रेफिक व्यू मिरर, सुरक्षा व्यवस्था (कुछ अति समझदार निवासियों एवं स्वार्थी तत्वों द्वारा कुप्रचार  के कारण बंद करनी पड़ी), मेधावी छात्रो का अलंकरण पौधारोपण इत्यादि। समितियों ने कुछ कार्य सभासद, विधायक, नगरपालिका चेयरमैन व अधिकारियो के सहयोग से संपन्न किये जैसे विभिन्न स्थानो पर उच्च अक्षमता वाले ट्रांसफ़ार्मरों की स्थापना, थ्री फेज लाइन, इत्यादि।

परंतु सोलानीपुरम की मूलभूत समस्याओं - बिजली, पानी, सडक, जल निकासी - को दूर करने मे दोनो संस्थाऐ असफ़ल रही। पत्राचार तो काफ़ी हुआ पर 09;भी तक ऐक्शन नजर नì1;ी आया।

मुझे ऐसा लगता है कि जनप्रतिनिधियों के साथ तालमेल के अभाव में ऐसा हो रहा है। इस प्रकार के प्रशासकीय कार्य बिना सभासद, चेयरमैन अथवा विधायक के सहयोग के हो ही नही सकते हैं। अत: सोलानीपुरम की दोनो संस्थाओं को चुने हुऐ जनप्रतिनिधियो की मदद से ही विकास कार्य कराने के प्रयास करने चाहिऐ। वैसे भी ये संस्थाऐ राजनैतिक नही हैं। अत: ऐसा करने मे अहं की कोई समस्या नही होनी चाहिये।

सोलानीपुरम के कुछ निवासियों का रवैया सदैव ही इन संस्थाओ के प्रति उदासीन रहा है, यह अच्छा लक्षण नही है। एक सभ्य समाज मे विकास कार्यो के प्रति ऐसी उदासीनता नकारात्मक मानसिकता को उजागर करती है। हमे अच्छे कार्यो की प्रशंसा व गलत कार्यो की आलोचना करनी चाहिये। विकास कार्यो के प्रति उदासीनता दिखाकर हमारा अपने ही पैरो परे कुल्हाडी मार रहें हैं। शायद सोलानीपुरम मे समिति कल्चर है ही नही।

वैसे अगर सोलानीपुरम मे एक ही संस्था कार्य करे तो ज्यादा अच्छा होगा। सोलानीपुरम जन कल्याण समिति व वेलफ़ेयर एसोसियेशन को एकजुट (merge) होकर कार्य करना चाहिये। अगर एकजुट नही हो सकती तो या तो एक दूसरे की पूरक होकर कार्य करें अथवा ऐसी आधी अधूरी समाज सेवा न करें।

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