A society is in danger when those who have never learnt to obey are given the rigt to command.ऐसा लगता है कि सोलानीपुरम जन कल्याण समिति का एकमात्र उद्देश्य सोलानीपुरम के विकास कार्यों मे बाधा डालना है। सोलानीपुरम(वेस्ट) मे अच्छी भली नवनिर्मित सड़क (ट्रांसफार्मर से मंदिर तक) को कोई मानसिक रूप से विकलांग व्यक्ति ही खराब बता सकता है (अमर उजाला, दिसंबर 27) या फिर वो जिसका राजनैतिक अथवा निजी स्वार्थ हो। अगर इस सड़क मे अभी से गढ्ढे बन गये हैं तो इसका फोटो अखबार मे क्यों नही प्रकाशित किया गया? कारण साफ है कि सड़क एकदम सही है तथा अमर उजाला ने अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह सही तरह से नही किया है। नगरपालिका चेयरमैन प्रदीप बतरा को ऐसे मामलो मे सिर्फ अपने विवेक से काम लेना चाहिये।
कितना अच्छा होता अगर यह समाचार सोलानीपुरम की उन सड़कों के लिये प्रकाशित होता जो वास्तव मे दयनीय अवस्था मे हैं तथा जिन पर अब तक नयी सड़क नही बनी है। परंतु मसला यह है कि समिति को सोलानीपुरम मे नयी सड़के बनवाने मे कोई रूचि नही है, उसकी रूचि तो सिर्फ नयी बनी सड़कों को तुड़वाना है।
मै भी पूर्व मे इस समिति का सदस्य रह चुका हूँ इसलिये जानता हूँ कि यह समिति सोलानीपुरम के विकास कार्यो के प्रति वास्तव कितनी गंभीर है!!! हाथी के दाँत दिखाने के और तथा खाने के और। यही कुछ हाल है इस समिति का। यही कारण है कि मैने इस समिति से इस्तीफा दे दिया था। किसी ने सही कहा है कि Stand with anybody that stands right; stand with him while he is right and part with him when he goes wrong (From the book "Living with Honour by Shiv Khera)"
आज अगर सोलानीपुरम मे विकास कार्य धीमी गति से हो रहा है तो सिर्फ इस समिति के द्वारा विकास कार्यों मे बाधा पहुँचाने के कारण। छुपा हुआ एजेंडा साफ है - वर्तमान सभासद को बदनाम करना और अपनी समाज सेवा की दुकान चलाना। शायद भविष्य मे सभासद पद का चुनाव लडना भी समिति के किसी सदस्य के एजेंडे मे हो सकता है!
इस समिति को बने कई वर्ष हो चुके हैं परंतु अब तक एक भी विकास कार्य मे इसका कोई सहयोग नही रहा है (कुछ गैर प्रशासनिक कार्यो जैसे दूरभाष निर्देशिका, गाइड मैप इत्यादि को छोड़कर)) अगर कुछ किया है तो प्रशासन द्वारा किये जा रहे विकास कार्यो मे अवरोध पैदा करना। सोलानीपुरम की कई प्रस्तावित सड़के केवल सोलानीपुरम जन कल्याण समिति के विरोध के कारण नही बन पा रही हैं। इससे अच्छे तो सोलानीपुरम के वे निवासी ही हैं जो अपने बलबूते पर स्वतंत्र रूप से सोलानीपुरम के विकास के लिये काम कर रहें हैं जैसे सुरक्षा व्यवस्था।
सोलानीपुरम जन कल्य़ाण समिति ने अपनी विश्वसनियता (trustworthiness) खो दी है। इस समिति का एकमात्र कार्य तो बस अखबारों मे अपनी फोटो छपवाना व विज्ञप्ति जारी करना ही रह गया है। यह समिति सिर्फ सुर्खियों मे रहना चाहती है।
और अंत में: समिति समय समय पर जो पैंफलेट प्रकाशित करती उसके बारे मे यह कहावत सटीक बैठती है कि नयी बोतल मे पुरानी शराब। वही पुरानी बाते बार बार। कोई भी निवासी प्रशासकीय कार्यो के बारे मे यह कह सकता है कि अमुक कार्य उसके प्रयास से हुये हैं। अगर आप वास्तव मे अपने क्षेत्र के विकास के प्रति चिंतित हैं तो काम कीजिये ढोल मत पीटिये। ये पब्लिक है ये सब जानती है।
History stands witness to the fact that those who cut their country's throat end up cutting their own.
No comments:
Post a Comment
Note: only a member of this blog may post a comment.