अंत मे वही हुआ जिसका अंदेशा था, गंग नहर पर एक करोड़ की लागत से बन रहा कागजी पुल आखिर गिर ही गया। तीन मजदूर डूब गये हैं।
मै तों अपने मित्रो से कहता था कि मै इस पुल से को कभी भी प्रयोग नही करूँगा। इस पुल मे घटिया सामग्री का प्रयोग हो रहा था तथा डिजाइन भी ठीक नही था। पुल के लिये बने टावर कागजी थे। पुल अत्यंत धीमी गति से बनाया रहा था तथा कभी - 2 तो ऐसा लगता था कि इसे चौक के मजदूर बना रहें हैं।
कुछ अनुत्तरित प्रश्न:
मै तों अपने मित्रो से कहता था कि मै इस पुल से को कभी भी प्रयोग नही करूँगा। इस पुल मे घटिया सामग्री का प्रयोग हो रहा था तथा डिजाइन भी ठीक नही था। पुल के लिये बने टावर कागजी थे। पुल अत्यंत धीमी गति से बनाया रहा था तथा कभी - 2 तो ऐसा लगता था कि इसे चौक के मजदूर बना रहें हैं।
कुछ अनुत्तरित प्रश्न:
- एन डी जी सी (उत्तरी खंड गंगनहर) के सुझाव (कंक्रीट पुल का निर्माण) की अनदेखी क्यों की गयी?
- सीधा ठेका क्यों दिया गया, टेंडर प्रणाली क्यों नही अपनायी गयी?
- पी डब्लू डी को ठेका क्यों दिया गया, सिंचाई विभाग को क्यों नही?
- पुल का डिजाइन गाजियाबाद की एक प्राइवेट फर्म को क्यों दिया गया - इंजीनियरों की नगरी मे इंजीनियर मर गये थे क्या?
- पुल के बनने में इतना अधिक वक्त क्यों लग रहा था?
वीडियो के लिये यहाँ क्लिक करें
इस दुर्घटना का एक मार्मिक वीडियों हयात अंसारी फिल्मस ने बनाया है। इसे देखने के लिये यहाँ क्लिक करें।
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तो यह था कुंभ निधि के एक छोटे से प्रोजेक्ट का ट्रेलर! आगे - 2 देखिये होता है क्या।
इस दुर्घटना (या मर्डर) में जान गंवा बैठे कारीगरों की आत्मा को ईश्वर शांति प्रदान करें व अपराधी दंडित हो, यही मेरी इच्छा है।
और अंत मे एक नर्सरी कक्षा मे पढाये जाने वाली एक कविता की कुछ पंक्तियाँ:
London Bridge is broken down,
Falling down, falling down.
London Bridge is falling down,
My fair lady.
.
.
.
.
Iron and steel will bend and bow,
Bend and bow, bend and bow,
Iron and steel will bend and bow,
My fair lady.





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