
आजकल रुड़की मे डेंगू तेजी से फैल रहा है। आई आई टी मै यह दस्तक दे चुका है, सोलानीपुरम में कभी भी आ सकता है। आज के इस पोस्ट मे मै इसी जानलेवा बीमारी के बारे मै लिख रहा हूँ।
डेंगू बीमारी ऐसा बुखार है जिसे महामारी के रूप में देखा जाता है। वयस्कों के मुकाबले, बच्चों में इस बीमारी की तीव्रता अधिक होती है। डेंगू के सामान्य लक्षण हैं सर दर्द, जोड़ों में मांसपेशियों में और शरीर में दर्द होना, तेज़ बुखार, चिडचिडा़पन।
डेंगू की स्थिति में मृत्युदर लगभग एक प्रतिशत है। यह बरसात के मौसम में तेज़ी से फैलता है। आपको या आपके पड़ोसी को अगर डेंगू बुखार हो जाता है, तो इससे बचने के उपाय अपनायें। सबसे पहले रक्तजांच करायें और अपने आसपास मच्छरों से सुरक्षा के उपाय अपनायें।
प्लेटलेट्स कम होने के नुकसान
प्लेटलेट्स दरअसल रक्त का थक्का बनाने वाली कोशिकाएं या सेल्स है जो लगातार नष्ट होकर निर्मित होती रहती है। ये रक्त में बहुत ही छोटी छोटी कोशिकाएं होती है। ये कोशिकाएं रक्त में 1 लाख से 3 लाख तक पाई जाती है। इन प्लेटलेट्स का काम टूटी-फूटी रक्तवाहिकाओं को ठीक करना है। डेंगू बुखार से संक्रमित व्यक्ति की प्लेटलेट्स समय-समय पर जांचनी चाहिए। प्लेटलेट्स की जांच ब्ल्ड टेस्ट के माध्यम से की जाती है।
डेंगू बुखार में प्लेटलेट्स कम होने से संक्रमित व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती है। दरअसल प्लेटलेट्स का काम ब्लड क्लॉटिंग है यानी बहते खून पर थक्का जमाना, जिससे ज्यादा खून न बहे। यानी ये शरीर से खून को बहने से रोकते हैं। अगर इनकी संख्या रक्त में 30 हजार से कम हो जाए, तो शरीर के अंदर ही खून बहने लगता है और शरीर में बहते-बहते यह खून नाक, कान, यूरीन और मल आदि से बाहर आने लगता है। कई बार यह ब्लीडिंग शरीर के अंदरूनी हिस्सों में ही होने लगती है। कई बार आपके शरीर पर बैंगनी धब्बे पड़ जाते है लेकिन आपको इनके बारे में मालूम नहीं होता, ये निशान भी प्लेटलेट्स की कमी के कारण होते है। यह स्थिति कई बार जानलेवा भी हो सकती है। डेंगू बुखार में यदि प्लेटलेट्स के कम होने होने पर ब्लड प्लेटलेट्स न चढ़ाए जाए तो डेंगू संक्रमित व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती है।
डेंगू बुखार के लक्षण
डेंगू बुखार के लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि बुखार किस प्रकार है। सामान्यत: डेंगू बुखार के लक्षण कुछ ऐसे होते हैं:
- ठंड के साथ अचानक तेज बुखार होना।
- ब्लड प्रेशर का सामान्य से बहुत कम हो जाना।
- मांसपेशियों तथा जोड़ों में दर्द होना।
- सरदर्द होना।
- अत्यधिक कमजो़री महसूस होना, भूख कम लगना।
- गले में दर्द होना।
- शरीर पर रैशेज़ भी हो सकते हैं।
- डेंगू बुखार दो से चार दिनों तक रहता है। इसके बाद बुखार कम हो जाता है परंतु लक्षण रहते हैं।
- डेंगू हिमोरेगिक बुखार सबसे खतरनाक माना जाता है जिसमें कि बुखार के साथ साथ शरीर में खून की कमी हो जाती है। शरीर में लाल या बैगनी रंग के फफोले पड़ जाते हैं। नाक या मसूड़ो से खून आने लगता है। स्टूल का भी रंग काला हो जाता है। यह डेंगु की सबसे खतरनाक स्थिति होती है।
डेंगू बुखार उस मच्छर के काटने से होता है जिसने पहले से ही किसी डेंगु के मरीज़ को काटा है। यह मच्छर बारिश के मौसम में बहुत ही तेज़ी से फैलता है और यह कहीं भी रूके पानी में प्रजनन प्रक्रीया शुरू कर देता है जैसे प्लास्टिक बैग ,कैन ,गमले या सड़को या कूलर में जमा पानी। मच्छर के एक बार काट लेने से ही डेंगू बुखार हो जाता है।
यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता है। वायरस के फैलने के लिए बीमार व्यक्ति का मच्छर से और फिर मच्छर का स्वस्थ व्यक्ति से सम्पर्क बहुत ही ज़रूरी है।
डेंगू उन लोगों को जल्दी प्रभावित करता है जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। यह चार तरीके के वायरस में से किसी एक के काटने से होता है। ऐसा सम्भव है कि डेंगू बुखार एक व्यक्ति को कई बार हो सकता है।
डेंगू का उपचार
डेंगू वायरस से होने वाली बीमारी है इसलिए इसके इलाज के लिए कोई दवा नहीं है। डेंगू का इलाज इससे होने वाली परेशानियों को कम कर के ही किया जा सकता है। बुखार में आराम करना और पानी की कमी को पूरा करना बहुत ही ज़रूरी हो जाता है। डेंगू बुखार से मौत निश्चित नहीं है। डेंगू बुखार से होने वाली मौतें 1 प्रतिशत से भी कम है। यह बीमारी अकसर एक से दो हफ्ते तक रहती है।
डेंगू से बचने के कुछ तरीके
- डेंगू से बचने के लिए मच्छरों से बचना बहुत ज़रूरी है जिनसे डेंगू के वायरस फैलते हैं।
- ऐसी जगह जहां डेंगू फैल रहा है वहां पानी को रूकने नहीं देना चाहिए जैसे प्लास्टिक बैग, कैन, गमले या सड़को या कूलर में जमा पानी।
- मच्छरों से बचने का हर सम्भव प्रयास करना चाहिए जैसे गुडनाइट एडवांस्ड प्रयोग करना, मच्छरदानी लगाना, पूरी बांह के कपड़े पहनना आदि।
सभासद महोदय, कुछ दिनों तक सोलानीपुरम में फॉगिंग व सफाई अभियान चलाऐं जिससे यह कातिल बीमारी सोलानीपुरम में न फैल सके।
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