वैसे सोलानीपुरम मे सिर्फ एक ही एसोसियेशन होनी चाहिये ताकि किसी प्रकार का कोई विवाद न हो तथा कॉलोनी के विकास पर ही संपूर्ण फोकस हो न कि छोटे मोटे मुद्दो पर। इससे किसी प्रकार का ईगो क्लैश भी नही होगा।
आज सोलानीपुरम कई प्रकार की समस्याओं से घिरा हुआ है जैसे खराब सड़के, दूषित जल, टूटी हुयी नालियाँ, बंद स्ट्रीट लाइट इत्यादि। ऐसे मे इन समस्याओं से निबटने के लिये एकजुट होकर प्रयास करने की आवश्यक्ता है अन्यथा सोलानीपुरम रुड़की की सबसे पिछडी कॉलोनी हो जायेगी। समीपवर्ती गांव खंजरपुर भी विकास के मामले मे आज सोलानीपुरम से कही आगे है।
ऐसा नही है कि वर्तमान सभासद कुछ कर नही रहें हैं, समस्या यह है कि विकास कार्यो का क्रैडिट सभी लोग लेना चाहते हैं, अत: अगर वो कुछ करने की शुरूआत करते हैं तो किसी न किसी बहाने से उस काम मे अड़ंगा लगा दिया जाता है जैसा कि सड़को के निर्माण मे हुआ। जैसे कि हिंदुस्तान मे सारे कार्य 100% ईमानदारी से हो रहे हों तथा हम सभी निवासी खुद दूध के धुले हों। वैसे भी नगरपालिका की टेंडर प्रणाली ही दोषपूर्ण है जिसमे अक्सर बहुत कम रेट पर ही टेंडर पास होता है तथा ठेकेदार को यहाँ वहाँ पैसे भी बाँटने पड़ते हैं। ऐसे मे वह ठेकेदार अगर पूरी ईमानदारी से काम करें तो क्या कमायेगा तथा क्या खायेगा। ऐसी स्थिति मे अगर किसी समिति को हमला करना ही है तो सभासद पर नही बल्कि टेंडर प्रणाली पर करें तो अच्छा होगा।
कुल मिलाकर ऐसोशियन का चुनाव का निर्णय प्रशंसनीय है।
We have plenty of confidence in our colony, but we are little short of good men to place our confidence in.
You may leave your comments on working of associations in Solanipuram and suggestions on developmental issues.
ReplyDeleteS K Jain