इस वर्ष भी सोलानीपुरम मे होली अत्यंत उत्साह से खेली गयी। क्या बच्चे क्या बड़े सभी होली के रंग मे मस्त थे। सोलानीपुरम मे चार स्थानों पर (दो वेस्ट व दो ईस्ट सोलानीपुरम मे) होलिका दहन हुआ। ईस्ट सोलानीपुरम के रजनीश गोयल ने बताया कि उनकी तरफ लोगो ने अत्यंत उत्साह से होलिका पूजन किया एवं होलिका दहन किया। प्रसाद वितरण भी किया गया। ईस्ट सोलानीपुरम मे ही पूर्व एस डी एम पी सी शर्मा के घर के सामने के खाली प्लाट पर भी होलिका दहन का शानदार कार्यक्रम हुआ। सोलानीपुरम मे ही स्थित भट कॉलोनी मे भी होलिका दहन हुआ।
वेस्ट सोलानीपुरम मे ट्रांसफार्मर के पास पी एस अग्रवाल ने आस पास के निवासियों से चंदा एकत्रित कर होलिका सजाई जिसका पूजन बड़ी श्रद्धा से आस पास के निवासियों ने किया। होलिका दहन पर आस पास के घरो के कई लोग उपस्थित थे।
वेस्ट सोलानीपुरम के गोल कैंपस मे सुरक्षा समिति ने यहाँ के निवासियों से चंदा एकत्रित कर बच्चों व महिलाओं के लिये खेल प्रतियोगिता, होलिका पूजन व अंत मे होलिका किया। खेल प्रतियोगिता मे स्लो साइकल रेस व म्युजिकल चेयर का आयोजन किया गया। जीतने वाले बच्चों व महिलाओं को पुरस्कृत किया गया। कॉलोनी के वरिष्ठ निवासियों ने बच्चों को पुरस्कार प्रदान किये। सुरक्षा समिति के संजय परमार ने बताया कि आगे भी इस प्रकार के कार्यक्रम निवासियों से सहयोग से होते रहेंगे। उन्होने यहाँ भी बताया कि सुरक्षा हेतु मासिक शुल्क रु. 100/- से घटाकर रु. 60/- कर दिया गया है। इस अवसर पर मुख्य अतिथि श्री जे पी शर्मा ने घोषणा की कि तीन महीनों के अंदर सोलानीपुरम मे जल आपूर्ति हेतु पानी की लाइन व गंदे पानी की निकासी हेतु सीवर लाइन का निर्माण किया जायेगा। इस प्रोजेक्ट हेतु धन ऐशियन डेवलपमेंट बैंक से प्राप्त हुया है। इसके अतिरिक्त ईस्ट सोलानीपुरम मे नलकूप का कार्य अंतिम चरण मे चल रहा है (इस नलकूप की गहराई लगभग 470 फीट है)। इसे विद्दुत आपूर्ति पास ही खंजरपुर मे बन रहे पावर स्टेशन से मिलेगी। उन्होने आगे घोषणा की कि अगर वेस्ट सोलानीपुरम के निवासी गेट के लिये 30% प्रतिशत राशि एकत्रित कर लेते हैं तो शेष 70% प्रतिशत राशि वे स्वयं देंगे।
आइये अब देखें सोलानीपुरम (ईस्ट/वेस्ट) मे खेली गयी रंग बिरंगी होली के कुछ दृश्य
वेस्ट सोलानीपुरम मे ट्रांसफार्मर के पास पी एस अग्रवाल ने आस पास के निवासियों से चंदा एकत्रित कर होलिका सजाई जिसका पूजन बड़ी श्रद्धा से आस पास के निवासियों ने किया। होलिका दहन पर आस पास के घरो के कई लोग उपस्थित थे।
वेस्ट सोलानीपुरम के गोल कैंपस मे सुरक्षा समिति ने यहाँ के निवासियों से चंदा एकत्रित कर बच्चों व महिलाओं के लिये खेल प्रतियोगिता, होलिका पूजन व अंत मे होलिका किया। खेल प्रतियोगिता मे स्लो साइकल रेस व म्युजिकल चेयर का आयोजन किया गया। जीतने वाले बच्चों व महिलाओं को पुरस्कृत किया गया। कॉलोनी के वरिष्ठ निवासियों ने बच्चों को पुरस्कार प्रदान किये। सुरक्षा समिति के संजय परमार ने बताया कि आगे भी इस प्रकार के कार्यक्रम निवासियों से सहयोग से होते रहेंगे। उन्होने यहाँ भी बताया कि सुरक्षा हेतु मासिक शुल्क रु. 100/- से घटाकर रु. 60/- कर दिया गया है। इस अवसर पर मुख्य अतिथि श्री जे पी शर्मा ने घोषणा की कि तीन महीनों के अंदर सोलानीपुरम मे जल आपूर्ति हेतु पानी की लाइन व गंदे पानी की निकासी हेतु सीवर लाइन का निर्माण किया जायेगा। इस प्रोजेक्ट हेतु धन ऐशियन डेवलपमेंट बैंक से प्राप्त हुया है। इसके अतिरिक्त ईस्ट सोलानीपुरम मे नलकूप का कार्य अंतिम चरण मे चल रहा है (इस नलकूप की गहराई लगभग 470 फीट है)। इसे विद्दुत आपूर्ति पास ही खंजरपुर मे बन रहे पावर स्टेशन से मिलेगी। उन्होने आगे घोषणा की कि अगर वेस्ट सोलानीपुरम के निवासी गेट के लिये 30% प्रतिशत राशि एकत्रित कर लेते हैं तो शेष 70% प्रतिशत राशि वे स्वयं देंगे।
आइये अब देखें सोलानीपुरम (ईस्ट/वेस्ट) मे खेली गयी रंग बिरंगी होली के कुछ दृश्य
आप अनुमान लगा सकते हैं कि कितने मन से खेली गयी होली सोलानीपुरम मे। ईश्वर करे कि यह सौहार्द सदैव बना रहे।
और अंत में:
होलिका का पूजन क्यों?
लोगों के मन में एक प्रश्न रहता है कि जिस होलिका ने प्रहलाद जैसे प्रभु भक्त को जलाने का प्रयत्न किया, उसका हजारों वर्षों से हम पूजन किसलिए करते हैं? होलिका-पूजन के पीछे एक बात है। जिस दिन होलिका प्रहलाद को लेकर अग्नि में बैठने वाली थी, उस दिन नगर के सभी लोगों ने घर-घर में अग्नि प्रज्वलित कर प्रहलाद की रक्षा करने के लिए अग्निदेव से प्रार्थना की थी। लोकहृदय को प्रहलाद ने कैसे जीत लिया था, यह बात इस घटना में प्रतिबिम्बित होती है।
अग्निदेव ने लोगों के अंतःकरण की प्रार्थना को स्वीकार किया और लोगों की इच्छा के अनुसार ही हुआ। होलिका नष्ट हो गई और अग्नि की कसौटी में से पार उतरा हुआ प्रहलाद नरश्रेष्ठ बन गया। प्रहलाद को बचाने की प्रार्थना के रूप में प्रारंभ हुई घर-घर की अग्नि पूजा ने कालक्रमानुसार सामुदायिक पूजा का रूप लिया और उससे ही गली-गली में होलिका की पूजा प्रारंभ हुई।
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