आज का ये लेख मै रुड़की नगर निगम की कूड़ा एकत्रित करने वाली गाड़ी को समर्पित करना चाहता हूँ। इस गाड़ी ने वास्तव में क्लीन रुड़की ग्रीन रुड़की के सपने को साकार किया है। वैसे तो इसका श्रेय नगर पालिका के तत्कालीन चेयरमैन प्रदीप बत्रा को जाता है पर यह भी सच है कि वर्तमान मेयर यशपाल राणा ने इसको बखूबी आगे बढ़ाया है।
मुझे याद है कुछ वर्ष पहले का वो समय जब सम्पूर्ण सोलानीपुरम (Solanipuram) का कूड़ा ट्रांसफार्मर के पास के मैदान में फैका जाता था। इस कारण सोलानीपुरम में आने वाले व्यक्ति पर अच्छा प्रभाव नही पड़ता था और गंदगी व बदबू भी रहती थी। पर कूड़ा वाहन गाड़ी के आने से न सिर्फ हमारी सोलानीपुरम अपितु सम्पूर्ण रुड़की (Roorkee) में सफाई नज़र आ रही है।
कुल मिलाकर ये कहा जा सकता है की अगर राजनीति से ऊपर उठकर विकास कार्य पर ध्यान दिया जाए तो न सिर्फ शहर का विकास होता है अपितु राजनेताओ के बीच एक स्वच्छ प्रतिस्पर्धा होती है न कि आरोप प्रत्यारोप की न ख़त्म होने वाली लड़ाई। प्रदीप बत्रा और यशपाल राणा दोनों ही रुड़की के विकास के लिए अच्छा कार्य कर रहे हैं। आज अगर रुड़की में चारो और चौड़ी सड़के, पार्क में झूले, बैंच, एडीबी प्रोजेक्ट (इसमें पूर्व विधायक सुरेश जैन का भी योगदान है), सड़कों के किनारे टाइलिंग। कूड़े से बिजली बनाने के प्रोजेक्ट पर भी काम चल रहा है। गंगा नहर पर पुल भी बन रहा है जो बढ़ते ट्रैफिक से निज़ात दिलाएगा।
कुल मिलाकर प्रदीप बत्रा और यशपाल राणा की आपसी स्वच्छ प्रतिस्पर्धा का फायदा विकास के रूप में रुड़की की जनता को मिल रहा है। मेरा तो ये मानना है की इस माडल को पुरे देश में अपनाना चाहिए जहाँ आरोप प्रत्यारोप के स्थान पर नेता लोग विकास कार्य कर अपने राजनैतिक विरोधियों का सामना करें।
मुझे याद है कुछ वर्ष पहले का वो समय जब सम्पूर्ण सोलानीपुरम (Solanipuram) का कूड़ा ट्रांसफार्मर के पास के मैदान में फैका जाता था। इस कारण सोलानीपुरम में आने वाले व्यक्ति पर अच्छा प्रभाव नही पड़ता था और गंदगी व बदबू भी रहती थी। पर कूड़ा वाहन गाड़ी के आने से न सिर्फ हमारी सोलानीपुरम अपितु सम्पूर्ण रुड़की (Roorkee) में सफाई नज़र आ रही है।
कुल मिलाकर ये कहा जा सकता है की अगर राजनीति से ऊपर उठकर विकास कार्य पर ध्यान दिया जाए तो न सिर्फ शहर का विकास होता है अपितु राजनेताओ के बीच एक स्वच्छ प्रतिस्पर्धा होती है न कि आरोप प्रत्यारोप की न ख़त्म होने वाली लड़ाई। प्रदीप बत्रा और यशपाल राणा दोनों ही रुड़की के विकास के लिए अच्छा कार्य कर रहे हैं। आज अगर रुड़की में चारो और चौड़ी सड़के, पार्क में झूले, बैंच, एडीबी प्रोजेक्ट (इसमें पूर्व विधायक सुरेश जैन का भी योगदान है), सड़कों के किनारे टाइलिंग। कूड़े से बिजली बनाने के प्रोजेक्ट पर भी काम चल रहा है। गंगा नहर पर पुल भी बन रहा है जो बढ़ते ट्रैफिक से निज़ात दिलाएगा।
कुल मिलाकर प्रदीप बत्रा और यशपाल राणा की आपसी स्वच्छ प्रतिस्पर्धा का फायदा विकास के रूप में रुड़की की जनता को मिल रहा है। मेरा तो ये मानना है की इस माडल को पुरे देश में अपनाना चाहिए जहाँ आरोप प्रत्यारोप के स्थान पर नेता लोग विकास कार्य कर अपने राजनैतिक विरोधियों का सामना करें।
Competition is a rude yet effective motivation.


No comments:
Post a Comment
Note: only a member of this blog may post a comment.