यूँ तो सोलानीपुरम को पॉश कॉलोनी कहा जाता है (हॉलाकि मै इसे पॉश मोहल्ला भी नही मानता) पर मेन ट्रांसफार्मर से आदर्श नगर जाने वाली सड़क की हालत को देखकर ऐसा नही लगता। वैसे जिस मोहल्ले में कई नेता हों और ज्यादा सयाने लोग हों वहां ऐसा होना स्वाभाविक है। हैरानी तो इस बात की है कि जो लोग इस खराब सड़क से प्रभावित हैं वो आश्चर्यजनक रूप से चुप हैं। शायद व्हाट्सएप या फेसबुक में व्यस्त होंगे। ये ज्यादा जरूरी जो है, सड़क तो होती रहेगी।
क्या ऐसी होती हैं पॉश कॉलोनी की सड़क
मैंने अक्सर सोलानीपुरम के लोगो को आपस में यहाँ के नेताओं की बुराई करते सुना है पर सोलानीपुरम की समस्याओं पर पार्षद और यहाँ के अन्य नेताओं से विचार विमर्श करते नही देखा। भाई, आप डाक्टर, इंजीनियर, बैंकर, अफसर या फिर बिजनेसमैन होंगे अपने घर के, जब सोलानीपुरम की समस्या की बात आए तो अपना ईगो (EGO) घर पर रखकर खुले दिमाग से आपस में परामर्श करें।
इस समस्या संदर्भ में सोलानीपुरम के तीन प्रमुख नेता सुशील यादव, जे पी शर्मा व रमेश जोशी क्या कर रहें हैं, मैं नही जानता। जोशीजी ने तो सोलानीपुरम वेलफेयर एसोसिएशन का व्हाट्सएप पर एक ग्रुप बनाया है जिसमे सोलानीपुरम की समस्याओं को छोड़कर सबकुछ पोस्ट किया जाता है। धन्य हैं इस ग्रुप के एडमिन जो इस ग्रुप को ढंग से संचालित नही कर पा रहे हैं। जे पी शर्मा क्या कर रहें हैं, पता नही। पिछले कुछ वर्षों से उन्हें सोलानीपुरम की सक्रिय राजनीति में नही देखा। इस सड़क को अगर सुशील यादव और रमेश जोशी से जोड़कर देखें तो यही कहा जा सकता है जैसे चिराग तले अन्धेरा! धन्य हैं ये महानुभाव। भाई थोड़ा समय बड़े नेताओं के साथ खींचे फोटो को फेसबुक पर डालने से निकालकर सोलानीपुरम की समस्याओं पर भी दे दो। आप का बहुत उपकार होगा।